28 जून 2011 - 19:30

बहरैन की तानाशाही आले ख़लीफा सरकार के समक्ष इस देश की जनता के प्रतिरोध के कारण इस देश से सऊदी सैनिकों के विदाई की भूमि प्रशस्त हो गयी है। लेबनान के अलमनार टीवी चैनल ने घोषणा की है कि सऊदी अरब ४ जूलाई को अपने अधिकांश सैनिकों को बहरैन से वापस बुला लेगा।

बहरैन की तानाशाही आले ख़लीफा सरकार के समक्ष इस देश की जनता के प्रतिरोध के कारण इस देश से सऊदी सैनिकों के विदाई की भूमि प्रशस्त हो गयी है। लेबनान के अलमनार टीवी चैनल ने घोषणा की है कि सऊदी अरब ४ जूलाई को अपने अधिकांश सैनिकों को बहरैन से वापस बुला लेगा। सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात के सैनिक अमेरिका की हरी बत्ती के बाद पिछले मार्च महीने से जनांदोलनों के दमन के लिए बहरैन गये हैं परंतु वे विस्तृत पैमाने पर मानवता विरोधी अपराध किये जाने के बावजूद बहरैनी जनता के इरादों का दमन नहीं कर सके। अतिग्रहणकारी सैनिकों और सुरक्षा बलों ने बहरैनी लोगों को शहीद किया, उन्हें गिरफ्तार करके जेलों में बंद किया, नाना प्रकार की यातना दीं, महिलाओं एवं लड़कियों के साथ बलात्कार किया, मस्जिदों और इमाम बाड़ों को ध्वस्त किया, पवित्र कुरआन को जलाया और इसके अतिरिक्त बहुत से मानवता विरोधी अपराध किये फिर भी वे बहरैनी जनता के फौलादी इरादों का दमन न कर सके। सऊदी अरब ने बहरैन में अपनी नीति के विफल हो जाने के बाद अगले चार पांच दिनों में अपने सैनिकों के एक भाग को बहरैन से बुलाने का निर्णय किया है। सऊदी सरकार क्षेत्र के देशों में होने वाले जनांदोलन को अपनी अलोकतांत्रिक सरकार के लिए ख़तरा समझती है और सऊदी अधिकारी इस देश में होने वाले हर प्रकार के आंदोलन से डरते हैं। इसी कारण वे बहरैन और यमन में अपने क्षेत्रीय घटकों की आर्थिक एवं सैनिक सहायता करके जनांदोलनों का दमन करने की चेष्टा में हैं। बहरैन से सऊदी सैनिकों के चले जाने के बारे में समाचारों का प्रकाशित होना इस बात का सूचक है कि क्षेत्रीय जनांदोलन की ज्वाला बुझने वाली नहीं है और इसके विपरीत यह सैनिक हैं जिन्हें जनता के इरादों के मुक़ाबले में पराजय का कटु स्वाद चखना पड़ेगा। हिन्दी एरिब डाट आई आर के धन्यवाद क साथ.